प्राचीन भारत के सबसे शुरुआती दौर के बारे जानकारी ।

नमस्कार दोस्तों आज के पोस्ट में हम प्राचीन भारत (ANCIENT INDIA) के सबसे शुरुआती दौर के बारे में बात करेंगे तो चलिए प्राचीन भारत (ANCIENT INDIA) के शुरुआत से शुरू करते हैं मानव ने कैसे इस दुनिया में छोटे-छोटे कामों को सीखा और यह कैसे आगे बढते रहे।
तो दोस्तों पूरी जानकारी के लिए पोस्ट को पूरा पढ़े ।

प्राचीन भारत (ANCIENT INDIA) के इतिहास में सबसे पुराना काल पाषाण युग के काल को माना जाता है तो दोस्तों आज के पोस्ट में हम पाषाण युग काल के बारे में ही जानेंगे पाषाण युग काल को 3 भागों में विभाजित किया गया है जो आपको नीचे दिए गए हैं।

1. पुरापाषाण काल
2. मध्य पाषाण काल
3. नवपाषाण काल

चलिए इन तीनों के बारे में पूरी details में जानते हैं।

 

1. पुरापाषाण काल (unknown - 8000 ईसापूर्व)


 

  • इसी काल में मनुष्य ने आग का आविष्कार किया।

  • इसी काल में मनुष्यों ने पत्थरों का इस्तेमाल कर कुछ औजार भी बनाए जैसे कि हैंड एक्स, स्कैपस इत्यादि

  • इस काल के सबूत इतिहास में बेलन नदी घाटी, सोहन नदी घाटी और नर्मदा नदी घाटी से मिला है

  • इस काल में गुफा चित्रकारी के भी सबूत मिले हैं यह सबूत भीमबेटका से मिला है जो मध्यप्रदेश के भोपाल में स्थित है।

  • इस काल में मनुष्य शिकारी हुआ करते थे।


 

2. मध्य पाषाण काल (8000 ईसापूर्व -4000 ईसापूर्व)


 

  • मध्यपाषाण काल में मनुष्यों ने औजारों का आकार छोटा किया जिन्हें माइक्रोलिया कहा गया।

  • इसी काल में मनुष्य ने पशुपालन की शुरुआत किया।

  • मध्य पाषाण काल के सबूत आजमगढ़ मध्य प्रदेश से इतिहास में मिला है ।

  • मानव कंकाल का प्रथम सबूत इसी काल के मिले हैं जो उत्तर प्रदेश के सराय नहर से मिला है।


 

3. नवपाषाण काल (4000 ईसापूर्व - 2500 ईसापूर्व)


 

  • नवपाषाण काल का प्रथम सबूत 1807 ई. में उत्तर प्रदेश के टोंस नदी घाटी में प्राप्त हुआ।

  • इसी काल में मनुष्य ने कृषि की शुरुआत की किया इसका प्रथम सबूत पाकिस्तान के बलूचिस्तान से प्राप्त हुआ

  • मनुष्य के द्वारा सबसे पहले जौ, गेहूं और कपास के कृषि की गई थी।

  • इसी काल में मनुष्यों ने पशुओं की सवारी करके एक स्थान से दूसरे स्थान जाने का प्रयोग किया

  • इसी काल के अंतिम चरण में मनुष्य ने तांबे की खोज किया।


 

ये भी पढ़ें :- भारतीय नोबेल पुरस्कार विजेता लिस्ट की पूरी लिस्ट

 

No comments:

Post a Comment